मां ,मेरी अपनी गुल्लक को मुझे शहीद कोष बनाना है। मां ,मेरी अपनी गुल्लक को मुझे शहीद कोष बनाना है।
इस संसार को जो गतिवान बनाती है अपने कर्म की पूर्ती सदैव करने का जो देती है सन्देश वो शाश्वत सत्य है ... इस संसार को जो गतिवान बनाती है अपने कर्म की पूर्ती सदैव करने का जो देती है सन्दे...
मां की कमी पिता पूरी नही कर सकता... मां की कमी पिता पूरी नही कर सकता...
शादी के मंडप में बैठी दो दो भाव मन में थे नए जीवन की थी शुरुआत पर अपने थे बिछड़ रह शादी के मंडप में बैठी दो दो भाव मन में थे नए जीवन की थी शुरुआत पर अ...
मैं चला उंगली पकड़कर, भूल कैसे पाऊंगा, कदम जब थकने लगें, आधार मैं बन जाऊंगा, मैं चला उंगली पकड़कर, भूल कैसे पाऊंगा, कदम जब थकने लगें, आधार मैं बन जा...
पिता के पत्र की एक किरण अंतर्मन मे प्रवेश किया पिता के पत्र की एक किरण अंतर्मन मे प्रवेश किया